Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -22-Sep-2022

हौसलों और उमीदों का पानी 
कभी सूखे नहीं 
दिल का दरिआ कभी 
इनसे महरूम न हो 
कशमकश का कारवां इतना आगे न बढ़ जाए 
की करना क्या और जाना कहाँ 
खुद को मालूम न हो 
बहुत बेसुरे हो जायेंगे जिंदगी के गीत 
अगर हौसलों का ताल और उमीदों का तरन्नुम न हो 
हौसलों और उमीदों का पानी हमेशा 
मिल जाए कामयाबी के समंदर में 
मेह्रूमियत के गंदे नाले में 
मिलकर गूम न हो 

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5 Comments

Pratikhya Priyadarshini

24-Sep-2022 10:41 PM

Bahut khoob 💐👍

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Raziya bano

23-Sep-2022 06:41 PM

Nice

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Abhinav ji

23-Sep-2022 07:59 AM

Very nice👍

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