लेखनी कहानी -22-Sep-2022
हौसलों और उमीदों का पानी
कभी सूखे नहीं
दिल का दरिआ कभी
इनसे महरूम न हो
कशमकश का कारवां इतना आगे न बढ़ जाए
की करना क्या और जाना कहाँ
खुद को मालूम न हो
बहुत बेसुरे हो जायेंगे जिंदगी के गीत
अगर हौसलों का ताल और उमीदों का तरन्नुम न हो
हौसलों और उमीदों का पानी हमेशा
मिल जाए कामयाबी के समंदर में
मेह्रूमियत के गंदे नाले में
मिलकर गूम न हो
Pratikhya Priyadarshini
24-Sep-2022 10:41 PM
Bahut khoob 💐👍
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Raziya bano
23-Sep-2022 06:41 PM
Nice
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Abhinav ji
23-Sep-2022 07:59 AM
Very nice👍
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